हे धरती माँ, मुझको अपने आप में समाहित कर लो.
इतने वर्षो (2025 - 1994) की पीड़ा को ह्रदय में दफनाये जी रहा. इस जीवन में सारे रिश्ते - नातों को सहेजने की पूर्णतः कोशिश की. इस दौरान चार बार आत्मह्त्या की भी असफल कोशिश की मगर फिर भी 47 बरस जिंदगी के काट लिए.
न जाने क्यूँ माता सीता का धरती में समाहित होने का प्रसंग बरबस याद आ रहा:
अयोध्या के राजमहल में देवी सीता आती हैं। सीता जी अपने चरित्र का प्रमाण देते हुए हाथ जोड़कर और प्रभु श्रीराम को देखे बिना कहती हैं कि "यदि मैं पवित्र हूं और मैंने प्रभु श्रीराम के अतिरिक्त किसी और के बारे में सोचा भी ना हो, तो धरती मां मैं आप में समा जाऊं। कृपया मुझे अपने साथ ले चलो।" सीता के मुख से यह बात सुनकर राजमहल की धरती तुरंत फट गई और स्वंय देवी धरा आकर सीता माता को अपने साथ ले गई। अपने सामने ऐसा विचित्र नजारा देखकर राजमहल में मौजूद लोग वैसे ही खड़े रह गए और माता सीता धरती में समा गईं।
कुछ इसी तरह, हे धरती माँ, मुझको अपने आप में समाहित कर लो. अब यही भाव मेरे ह्रदय में पैदा हो रहे.
तुमसे मुलाक़ात, और मेरी जिंदगी की सारी आरजू समाप्त.
हे धरती माँ, मुझको अपने आप में समाहित कर लो.
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